ब्लैक-बोर्ड

खिड़की से वाहर देखा,

नजरे दूर तक जाती है।

और छितिज पर टिक जाती है।

वहा शून्यता का आभाष होता है।

और वापस मैं देख लेता हूं,

वही ब्लैक-बोर्ड क्लास का।

जो रोज कुछ बताता है।

क्या है? क्या ज्ञात है।

क्यों है? क्या अज्ञात है।

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